Budget 2024, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर, एक रणनीतिक आर्थिक गेम चेंजर आइडिया

Budget 2024, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर, एक रणनीतिक आर्थिक गेम चेंजर आइडिया

Budget में उल्लिखित उस ‘गेम चेंजर आइडिया’ को समझें जिसे भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर पर कहा गया है। इस परियोजना में दुनिया भर के कई पोर्ट्स शामिल होंगे। यह परियोजना भारत में आयोजित 2023 के जी-20 समिट में घोषित की गई थी।

केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सरकार के अन्तरिम Budget भाषण में इंडिया-मिडिल-ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर परियोजना का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल भारत के लिए एक गेम चेंजर साबित हुई है, बल्कि इसने दुनियाभर में भारत के प्रभाव को बढ़ावा दिया है।

इस स्थिति में, हम इस रिपोर्ट में विस्तार से समझेंगे कि भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर क्या है। इसका भारत पर क्या प्रभाव होगा और इस योजना से भारत कैसे लाभान्वित होगा?

कब और क्यों शुरू हुआ?

पिछले वर्ष (2023) में भारत में आयोजित जी-20 समिट में एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई थी। इस समिट के दौरान, भारत, यूरोपीय संघ, अमेरिका और सऊदी अरब ने एक मेगा परियोजना पर मिलकर काम करने की घोषणा की थी। इस परियोजना का नाम था ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर’।

इस परियोजना का समर्थन 9 सितंबर 2023 को किया गया था। उस समय, भारतीय प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा था कि यह योजना भारत के विकास का प्रतीक बनेगी।

इसके अलावा, मीडिया को दिये गए हाल ही के इंटरव्यू में, विदेश मंत्री S Jaishankar ने कहा कि ‘इंडिया-मिडिल-ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर’ आने वाले 10 वर्षों के लिए एक गेम चेंजिंग आइडिया है।

इस परियोजना क्या है?

‘इंडिया-मिडिल-ईस्ट-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर’ योजना का उद्देश्य मध्य पूर्व के देशों को भारत से रेलवे और पोर्ट के माध्यम से जोड़ना है। इस कॉरिडोर के निर्माण के बाद, व्यापार के दौरान शिपिंग समय, लागत और इंधन कम खर्च होगा। इसके अलावा, यह कॉरिडोर खाड़ी से यूरोप तक व्यापार के प्रवाह में मदद करेगा।

इसके अलावा, इस परियोजना में शामिल देशों को अधिक ऊर्जा उत्पादों को उत्पन्न करने और व्यापार करने की क्षमता मिलेगी।

इस परियोजना की घोषणा से पहले, अमेरिकी अधिकारी फाइनर ने कहा था कि अमेरिका के दृष्टिकोण से यह समझौता पूरे क्षेत्र में तनाव कम करेगा और हम महसूस करते हैं कि यह संघर्ष से निपटने में मदद करेगा।

इस परियोजना के तहत क्या होगा, इसे पांच बिंदुओं में समझें:

1. ‘इंडिया-मिडिल-ईस्ट-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर’ में रेलवे, शिपिंग नेटवर्क्स और सड़क परिवहन मार्ग शामिल होंगे।
2. इस परियोजना के तहत दो अलग कॉरिडोर बनाए जाएंगे, पहला है पूर्वी कॉरिडोर जो भारत को खाड़ी क्षेत्र से जोड़ने में मदद करेगा। दूसरा उत्तरी कॉरिडोर है जो खाड़ी क्षेत्र को यूरोप से जोड़ेगा।
3. कॉरिडोर के निर्माण के साथ, इसमें शामिल सभी सातो देशो को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत, अमेरिका, संयुक्त अरब इमारत, फ्रांस, जर्मनी, इटली, सऊदी अरबिया, संयुक्त अरब इमारत और यूरोपीय संघ को पहले से अधिक लाभ होगा।
4. ‘इंडिया-मिडिल-ईस्ट-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर’ को चीन के BRI परियोजना का विकल्प भी देखा जा रहा है, जिसे ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ कहा जाता है। BRI परियोजना चीन की एक महत्वपूर्ण योजना है जिसके तहत चीन विश्व के बीच में हरित और डिजिटल सेतु बनाने की कोशिश कर रहा है।
5. समझें कि समझौते के तहत इस कॉरिडोर में एक रेल और पोर्ट नेटवर्क भी बनाया जाएगा, जिसमें सभी सात देश ‘Partnership for Global Infrastructure Investment’ के तहत निवेश करेंगे।

यह परियोजना कितनी महत्वपूर्ण है, इससे कैसा लाभ होगा?

‘इंडिया-मिडिल-ईस्ट-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर’ के गठन के बाद, यह दक्षिण पूर्व एशिया से गल्फ, पश्चिम एशिया और यूरोप की ओर व्यापार के पथ पर मजबूती से बढ़ेगा। भारत को इससे न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक लाभ भी होगा। इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्र में भारत के लिए विशाल अवसर पैदा होंगे।

यह कॉरिडोर भारत को वर्तमान से तेज और सस्ते ट्रांजिट विकल्प प्रदान करेगा। जिससे भारत के व्यापार और निर्यात में बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा, यह कॉरिडोर यह गलियारा क्षेत्र में हमारी स्थिति को मजबूत करेगा और हमारी कंपनियों के लिए एक अवसर बनेगा जिससे वे बुनियादी ढांचे के निर्माण में समानता के साथ भागीदारी कर सकें। यह कॉरिडोर आपूर्ति श्रृंगों को सुरक्षित करेगा, रोजगार उत्पन्न करेगा, और व्यापार सुविधा और पहुंच को सुधारेगा।

इस परियोजना में कौन-कौन से पोर्ट्स शामिल होंगे?

इस परियोजना में दुनिया भर के कई पोर्ट्स शामिल होंगे। इनमें मुंद्रा पोर्ट, गुजरात में स्थित कांडला पोर्ट, भारत और नवी मुंबई में स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट शामिल होंगे।

इसके अलावा, संयुक्त अरब इमारत में फुजैरा, जेबेल अली और अबु धाबी के पोर्ट्स, सऊदी अरबिया में दम्माम और रस अल खैर पोर्ट्स शामिल होंगे। यूरोप में, ग्रीस का पिरायस पोर्ट, इजरायल का हैफा पोर्ट, इटली का दक्षिणी मेसीना और फ्रांस का मारसिल जोड़े जाएंगे। इस परियोजना के तहत एक रेलवे लाइन फुजैरा पोर्ट को सऊदी अरबिया (गुवैफात और हराद) और हैफा पोर्ट (इजरायल) से जोड़ेगी।

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