Uttarakhand में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रस्ताव के बारे में मुस्लिम समुदाय की चिंता और उतार-चढ़ाव, समर्थन और चुनौतियाँ

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रस्ताव के बारे में मुस्लिम समुदाय की चिंता और उतार-चढ़ाव, समर्थन और चुनौतियाँ

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रस्ताव के प्रस्तावना से हंगामा मचा है। सरकार से लेकर पार्टी तक से लड्डू बाँटे जा रहे हैं, लेकिन मुस्लिम समुदाय UCC से असंतुष्ट है। मुस्लिम समुदाय के लोग साफ़ तौर पर कह रहे हैं कि UCC को मुस्लिम समुदाय को लक्षित करने के लिए ही लाया गया है।

मुस्लिम समुदाय UCC के बारे में विभिन्न राय रख रहा है। जो कुछ अब तक UCC में सामने आया है, उसका कहना है कि बिल पूरी तरह से अभी तक प्रकट नहीं हुआ है। इसे पढ़ने के बाद ही अधिक कहा जा सकता है। फिर भी, जो सभी बिंदुओं से अब तक सामने आया हैं, उसके बारे में मुस्लिम समुदाय का कहना है कि सरकार ने जातियों को UCC से अलग रखकर सिर्फ मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लाया गया है।

वकील रज़िया बेग कहती हैं कि सरकार विवाह के लिए कौन सी कानूनी प्रक्रिया को UCC के माध्यम से ला रही है। UCC का मतलब एक समान कानून है, लेकिन जब जातियों को इसके बाहर रखा गया है, तो इसे कैसे एक समान कानून बनाया जा सकता है? UCC किसके लिए लाई जा रही है?

सिख समुदाय में विवाह आनंद विवाह अधिनियम के तहत होता है, जबकि ईसाई लोगों के भी अपने रीति-रिवाज होते हैं। इस तरह, मुस्लिम समुदाय में भी अलग-अलग प्रणालियाँ हैं। सभी के अलग-अलग परंपराएँ हैं, तो इन्हें सभी को एक ही कानून के तहत कैसे लाया जा सकता है। अगर यह लाया जा सकता है तो फिर जाति-विशेष में से लोग किस कानून को अपनाएंगे? सरकार ने इसकी स्थिति को स्पष्ट किया है?

रज़िया बेग पूछती हैं कि क्या ईदत मुस्लिम समुदाय में धार्मिक मामला है। क्यों मुस्लिम महिलाएँ ईदत को छोड़ें? अगर इस तरह उनके घरों में झगड़े होंगे, तो क्या सरकार हमारे घरों में झगड़े खड़े करना चाहती है? अगर आप महिलाओं के अधिकार सुरक्षित करना चाहते हैं, तो उनके लिए विधानसभा में सीटें आरक्षित करें, उनके लिए नौकरियाँ आरक्षित करें, तो इस तरह महिलाओं के अधिकार बड़े हिस्से में सुरक्षित हो जाएंगे। सरकार मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के लिए नहीं, उनके घरों में झगड़े खड़े करने के लिए यह कानून ला रही है।

घरों में झगड़े खड़े करने के लिए सरकार कानून ला रही है

उसने सवाल उठाया कि पश्चिमी संस्कृति को समाज में कानूनी बनाकर, यह हिंदुओं के भी हित में नहीं होगा। अगर सरकार UCC के माध्यम से मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की बात कर रही है, तो सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि हिन्दू महिलाओं को कौन-कौन से अधिकार मिले हैं? 50% सम्पत्ति में हिन्दू महिलाओं को यह अधिकार पूरी तरह से नहीं मिला है, तो वे इसे मुस्लिम महिलाओं को कैसे देंगे?

एक तानाशाही दृष्टिकोण अपनाया गया था

इसी तरह, स्थानीय निवासी लताफ़त हुसैन कहते हैं कि UCC कानून जल्दी में लाया गया है और उसमें एक तानाशाही दृष्टिकोण अपनाया गया है। जब यूसीसी के लिए समिति गठित की गई थी और किन मामलों पर सुझाव मांगे गए थे, उसका भी स्पष्टीकरण नहीं किया गया था। अगर हम एक देश, एक कानून की बात कर रहे हैं, तो यहां समानता कहाँ है? जब जातियाँ स्वयं अलग रख दी गई थीं। यहाँ से लड़कियाँ किस कानून के तहत अन्य राज्यों में शादी करेंगी? इस प्रांत में विभिन्न जाति और धर्मों के लोग रहते हैं, तो यह कानून कितने हद तक संभव होगा? जो अब तक सामने आया है, वह यह बता रहा है कि UCC के द्वारा शरीयत का हमला किया जा रहा है। इस कानून को मुस्लिम समुदाय को लक्षित करने के लिए लाया गया है।

शहजाद पहाड़ी कहते हैं कि UCC के संबंध में मुस्लिम समुदाय में उत्पन्न भय का माहौल प्राकृतिक है क्योंकि यह विधेयक पूरी तरह से अभी तक पढ़ा नहीं गया है। जो अब तक सामने आया है, वह यह सिद्ध करता है कि सरकार ने UCC जल्दी में लाया है और यह केवल एक समाज को लक्षित करने के लिए लाया गया है।

एक सवाल उठता है कि यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक लिव-इन संबंधों में है, तो वह कितनी बार पंजीकरण करवाएगा? एक पुरुष या महिला एक से अधिक लिव-इन संबंधों में रह सकते हैं और अगर उस संबंध में एक बच्चा होता है, तो उसके अधिकारों को कितने हद तक संरक्षित किया जाएगा? शरियत में ईदत की अवधि रखी जाती है ताकि पति की मौत के बाद या तलाक के बाद इस अवधि के दौरान यह पता चल सके कि महिला गर्भवती है या नहीं। यदि यह UCC के केंद्र का मामला है, तो उसे राज्य में क्यों लाया जा रहा है? यह एक बड़ा सवाल है कि केंद्र सरकार जब यूसीसी लाएगी, क्या UCC यहां लागू किया जाने वाला राज्य में समान रूप से प्रभावी होगा?

सम्पूर्ण समाचार यही है कि Uttarakhand में UCC के मुद्दे पर मुस्लिम समुदाय की चिंता और उतार-चढ़ाव का प्रतिनिधित्व करती है, जिससे स्पष्ट होता है कि UCC के बारे में सामान्य और सहिष्णु चर्चा की आवश्यकता है, सुनिश्चित करते हुए कि सभी धार्मिक और सांस्कृतिक समुदायों के चिंताओं और अधिकारों का सम्मान और समर्थन किया जाए।

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